कभी ना कहो की दिन अपने खराब है,
समझ लो की हम काँटों से घिर गए गुलाब है,
रखो हौसला वो मंजर भी आयेगा,
प्यासे के पास चलकर समंदर भी आयेगा....
थक कर ना बैठो , ऐ मंजिल के मुसाफिर ;
मंजिल भी मिलेगी और जिने का मजा भी  आयेगा ।
      
    

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